Explore बीकानेर: Heritage, Culture & Royal Legacy Explained
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राजस्थान की शान बीकानेर – Heritage • Culture • Pride
Bikaner Rajasthan history
बीकानेर - करणी माता के आशीर्वाद से 1488 ई. में जोधपुर के संस्थापक राव जोधा के पांचवे पुत्र राव बीका के द्बारा आखा तीज के दिन बीकानेर की स्थापना की गई थीं आखा तीज को बीकानेर का स्थापना दिवस मनाया जाता है इस दिन बीकानेर में पतंगबाजी भी की जाती है
बीकानेर को ऊन का घर, राती घाटी, जांगल प्रदेश के नाम से भी जाना जाता है
लालगढ़ पैलेस -लालगढ़ पैलेस ,हजार हवेलियों के शहर के रूप में प्रतिष्ठित बीकानेर में स्थित है इस भव्य राजमहल का निर्माण बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था लालगढ़ पैलेस में अनूप संस्कृत लाइब्रेरी एवं सार्दुल संग्रहालय है अनूप संग्रहालय में जर्मन चित्रकार ए. एच. मूलर द्वारा चित्रित अनेक चित्र हैं, जो बीकानेर चित्र शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं
जूनागढ़ -हजार हवेलियों के शहर के रूप में प्रतिष्ठित बीकानेर के ह्रदय स्थल में स्थित जूनागढ का निर्माण बीकानेर के महाराजा रायसिंह के शासन काल में 1589 ईस्वी में प्रारंभ हुआ था, जो 1594 ईस्वी में पूर्ण हुआ था जूनागढ़ दुर्ग को जमीन का जेवर तथा राती घाटी के नाम से भी जाना जाता है
जूनागढ बाहर से जितना सुदृढ है ,इसका आंतरिक भाग उतना ही कलात्मक, भव्य एवं दर्शनीय है
जूनागढ लाल पत्थरों से निर्मित है ,जबकि कतिपय पोल पीले पत्थरों से निर्मित है, जिसमें सूरजपोल अद्वितीय है.
जूनागढ का मूल आधार तो राजपूत स्थापत्य शैली में है, किन्तु इसके कंगूरों व झरोखों पर मुस्लिम स्थापत्य शैली का प्रभाव है, जो हमारे देश की सांझी संस्कृति को परिलक्षित करता है
इस दुर्ग के अनूप महल में सोने की कलम से काम किया हुआ है इस महल में बीकानेर के शासको का राजतिलक होता था
चित्तौड़गढ़ के साके में वीरगति पाने वाले जयमल तथा फत्ता की गजारूढ मूर्तियां जूनागढ़ दुर्ग के सूरजपोल में स्थित है
लूणकरणसर- मूंगफली के उत्पादन के कारण लूणकरणसर को राजस्थान का राजकोट कहा जाता है लूणकरणसर में जैतून के तेल का शोध केंद्र भी स्थित है
देवीकुंड छतरियां - यहां पर बीकानेर के राजाओं की छतरियां है जिसमें प्रथम छतरी कल्याणमल की है वहीं अंतिम छतरी गंगा सिंह की है
गजनेर - यहां गजनेर वन्य जीव अभ्यारण है जो रेतीले तीतर (बटबड़ पक्षी) हेतु प्रसिद्ध है
कतरियासर - यहां पर जसनाथ जी संप्रदाय की प्रधान पीठ है अग्नि नृत्य का उत्पत्ति स्थल कतरियासर ही माना जाता है
कोलायत - यह कपिल मुनि की तपोस्थली मानी जाती है यहां पर कपिल मुनि का कार्तिक मास की पूर्णिमा को विशाल मेले का आयोजन किया जाता है कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रणेता मानी जाते है कोलायत झील पर कार्तिक पूर्णिमा को मेले का आयोजन किया जाता है इस झील को शुष्क मरुस्थल का सुंदर मरू उधान के नाम से भी जाना जाता है
पलाना - यह लिग्नाइट कोयले के लिए प्रसिद्ध है और जामसर में जिप्सम के भण्डार मौजूद हैं
देशनोक - यहां पर करणी माता का मंदिर है जो चूहों की देवी मानी जाती है करणी माता का मेला चैत्र तथा आश्विन नवरात्र में लगता है
नोखा - यहां मुकाम में बिश्नोई संप्रदाय की प्रधान पीठ है
बरसिहंसर - यहां पर लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत परियोजना है
राजस्थान राज्य अभिलेखागार- राजस्थान राज्य अभिलेखागार की स्थापना 1955 में जयपुर में हुई थी 1960 में इसे बीकानेर स्थानांतरित कर दिया गया
राजस्थानी भाषा, साहित्य व संस्कृति अकादमी- राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृति अकादमी की स्थापना 1983 में बीकानेर में हुई थी इस अकादमी के द्वारा जागती जोत नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जाता है इस अकादमी के द्वारा सूर्यमल मिश्रण पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है
जोहड़ बीड़ -राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र बीकानेर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर जोड़बीड़ क्षेत्र में स्थित है जिसे 20 सितम्बर, 1995 को क्रमोन्नत कर 'राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र' का नाम दिया गया है। 1984 में इसकी स्थापना एक 'ऊंट निदेशालय' के रूप में की थी।
उस्ता कला - उस्ता कला मूलतः पर्शिया से बीकानेर के शासक राय सिंह के द्वारा लाई गई थी इसमें ऊंट की खाल पर सुनहरी नक्काशी की जाती थी
हिसामुद्दीन उस्ता- 1986 में उस्ता कला के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया
मथैरण कला भी बीकानेर की प्रसिद्ध है
सिहंथल - रामस्नेही संप्रदाय की पीठ सिहंथल में भी है जिसके प्रवर्तक संत हरिराम दास जी को माना जाता है
सोंथी - यह हड़प्पा कालीन सभ्यता स्थल है
समराथल- समराथल ( बीकानेर) में संत जांभोजी ने बिश्नोई समाज की स्थापना की थी
1978 में बीकानेर में बेर तथा खजूर अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई
1993 में बीकानेर के बीछवाल में केंद्रीय शुष्क बागवानी अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई
एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी, गलीचा प्रशिक्षण केंद्र तथा ऊन विश्लेषण प्रयोगशाला बीकानेर में है
रामपुरिया हवेलियां , बच्छावतो की हवेली तथा कागा की हवेली बीकानेर में स्थित है
रम्मत बीकानेर का प्रसिद्ध लोकनाट्य है#Bikaner #BikanerDiwas #BikanerFoundationDay #Rajasthan #RajasthanTourism
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