राजस्थान के प्रजामंडल आन्दोलन मारवाड़ प्रजामंडल
मारवाड़ प्रजामंडल. सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में आयोजित हरिपुरा अधिवेशन मे कांग्रेस ने निर्णय लिया कि कांग्रेस को रियासती जनता के संघर्ष में साथ देना चाहिए इस अधिवेशन में उत्तरदाई शासन की स्थापना के लिए स्थानीय रियासतों में प्रजामंडल की स्थापना का प्रस्ताव पारित हुआ! मारवाड़ राज्य में 1920 में स्थापित मारवाड़ सेवा संघ ने राजनीतिक चेतना जागृत की! इस संगठन ने खाद्यी प्रचार और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के कार्यक्रम चलाए मारवाड़ सेवा संघ के आंदोलन से ही महाराजा को मादा पशुओं के निर्यात पर रोक लगाने पड़ी! मारवाड़ हितकारिणी सभा:- सन 1924 ईस्वी में जय नारायण व्यास व आनंदराज सुराणा ने जोधपुर में मारवाड़ हितकारिणी सभा की स्थापना की अपनी स्थापना के प्रथम 2 वर्ष संस्था जोधपुर महाराजा के प्रति निष्ठावान बनी रही इसके बाद इस संस्था ने मारवाड़ में वास्तविक रूप से जनजागृति पैदा की! सन 1929 ईस्वी में जयनारायण व्यास और उनके सहयोगियों द्वारा जोधपुर में अखिल भारतीय देसी राज्य लोक परिषद के अधिवेशन बुलाए जाने पर राज्य ने प्रतिबंध लगा दिया अतः जयनारायण व्यास ने पोपा बाई री पोल व मारवाड़ की अवस्था नामक दो पत्रिकाएं लिखकर मारवाड़ के शासन की कड़ी आलोचना की. ! राज्य ने मारवाड़ हितकारिणी सभा के प्रमुख कार्यकर्ता जय नारायण व्यास आनंदराज सुराणा और भंवर लाल सर्राफ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और इन पुस्तकों पर प्रतिबंध लगा दिया ! 10 मई 1931 को जयनारायण व्यास ने मारवाड़ी यूथ लीग की स्थापना की 24- 25 नवंबर 1931 को मारवाड़ राज्य लोक परिषद का अधिवेशन पुष्कर में चांदकरण शारदा की अध्यक्षता में हुआ जिसमें जागीरदारी अत्याचारों और राज्य के दमन की आलोचना की गई तथा उत्तरदाई शासन की स्थापना के लिए प्रस्ताव पास किया गया! मारवाड़ राज्य ने 7 मार्च 1932 को एक विज्ञप्ति जारी कर नागरिकों को किसी भी आंदोलन में भाग न लेने के लिए आग्रह किया इस विज्ञप्ति में दंड के स्वरूप 6 माह का कारावास व जुर्माने का प्रावधान था 1934 ईस्वी में मारवाड़ पब्लिक सोसाइटी ऑर्डिनेंस जारी किया गया जिसमें नागरिकों पर भी अधिक प्रतिबंध लगा दिए गए. ! मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना:- मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना 19 34 ईस्वी में जय नारायण व्यास द्वारा पानमल जैन ,अभय मल मेहता, भंवरलाल सर्राफ व छगनराज चौपालसनी के साथ मिलकर की! प्रजामंडल के प्रथम अध्यक्ष भंवरलाल सर्राफ था! राज्य ने सभा व भाषणो पर प्रतिबंध लगाते हुए जय नारायण व्यास को राज्य से निष्कासित कर दिया! कृष्णा दिवस:- सन 1935 ईस्वी में कृष्णा कुमारी नामक युवा विधवा महिला का राजघराने के कुछ व्यक्ति की साझेदारी से अपहरण कर लिया !जब किसी ने सुनवाई नहीं की तब उनकी माता ने मारवाड़ प्रजामंडल के पदाधिकारियों से इनकी शिकायत की !प्रजामंडल ने इस मामले की पैरवी करते हुए राज्य को अनेक पत्र लिखें और 1936 ईस्वी में कृष्णा दिवस मनाया गया ! 1936 में नेहरू जी के जोधपुर आवागमन पर विशेष सत्कार करने पर जोधपुर रियासत द्वारा प्रजामंडल को अगस्त 1936 में गैरकानूनी घोषित कर दिया गया मारवाड़ लोक परिषद की स्थापना प्रजामंडल पर प्रतिबंध लगा होने से मई 1938 में मारवाड़ लोक परिषद की स्थापना की गई इसके अध्यक्ष रणछोड़ गट्टानी व महासचिव अभय मल मेहता थे निष्कासित जय नारायण व्यास को इसका मुख्य उद्घोषक बनाया गया. सुभाष चंद्र बोस की जोधपुर यात्रा:- 23 जनवरी 1938 को विदेश से भारत आते समय सुभाष चंद्र बोस जोधपुर हवाई अड्डे पर उतरे यहां उन्होंने नौजवानों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि सफलता प्राप्त करने का यही सुनहरा अवसर है इसे हाथ से नहीं जाने देना चाहिए. विजयलक्ष्मी पंडित और सुभाष चंद्र बोस के जोधपुर आवागमन से आंदोलन को बल मिला! 1939 ईस्वी में जयनारायण व्यास पर से प्रतिबंध हटाए जाने से उत्तरदाई शासन की मांग ने जोर पकड़ा !29 मार्च 1940 को लोक परिषद को गैरकानूनी घोषित कर सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया कठोर दमन के बावजूद भी जब सरकार आंदोलन को दबा नहीं सकी तो 8 जून 1940 को लोक परिषद के साथ समझौता कर लिया इससे लोक परिषद को मान्यता देना व राजनीतिक बंदियों को रिहा करने जैसी शर्त थी जून 1941 में नगर पालिका चुनाव में लोक परिषद को बहुमत मिलने पर जय नारायण व्यास जोधपुर नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गया! 28 मार्च 1942 को चंडावल (सोजत )की घटना हुई इस अत्याचार के विरुद्ध लोक परिषद ने जोधपुर में जयनारायण व्यास के नेतृत्व में सत्याग्रह किया! जयनारायण ने उत्तरदाई शासन व जोधपुर की स्थिति पर प्रकाश नामक पुस्तिकाएं लिखकर राज्य और जगीरदारो के दमन को उजागर किया! सन 1942 में महिलाओं के सत्याग्रह जत्थे का नेतृत्व महिमा देवी किंकर ने किया और प्रतिबंधित पुस्तक उत्तरदाई शासन पढ़कर सुनाई !जोधपुर में पहली बार महिलाओं ने केसरिया साड़ी पहनकर घंटा घर के समीप सत्याग्रह किया! 18 अगस्त 1942 को निकाली गई प्रभात फेरी में रमा देवी, कृष्णा कुमारी, व दयावती शामिल थी! सन 1942 में आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए बालमुकुंद बिस्सा ने जेल में भूख हड़ताल की !भूख हड़ताल के दौरान जेल अधिकारियों के अत्याचारों व उपचार के अभाव से 19 जून 1942 को बालमुकुंद बिस्सा की मृत्यु हो गई! 26 जुलाई 1942 को पूरे राजस्थान में मारवाड़ सत्याग्रह दिवस मनाया गया अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होते ही लोक परिषद के कार्यकर्ता करो या मरो के नारे के साथ आंदोलन में कूद पड़े! मारवाड़ में विद्यार्थियों ने भी इस आंदोलन में क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया! मई 1944 में सरकार के साथ समझौते के बाद सभी राजनीतिक बंदी रिहा हो पाए ! नवंबर 1944 ईस्वी में जोधपुर नगर पालिका चुनाव में लोक परिषद को बहुमत मिला द्वारकादास पुरोहित नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए! सन 1945 ईस्वी में महाराजा ने प्रशासनिक सुधार की घोषणा की लेकिन 69 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा पर महाराजा एवं मुख्यमंत्री का नियंत्रण ही रहा ! डाबड़ा काण्ड 13 मार्च 1947 ईस्वी को डाबड़ा गांव डीडवाना नागौर में आयोजित किसान सम्मेलन पर जागीरदारों ने नृशंस अत्याचार किए! जिसमें 12 किसान शहीद हो गए! जून 1947 में महाराजा उम्मेद सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र हनुमंत सिंह शासक बने उन्होंने प्रधानमंत्री वेंकटचारी को हटाकर अगस्त 1947 में उत्तरदाई शासन के स्थान पर सामंती मंत्रिमंडल बनाकर अपने चाचा अजीत सिंह को मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया गया !जयनारायण व्यास ने 26 जनवरी 1948 से जन आंदोलन शुरू करने की घोषणा की अंततः दबाव में 3 मार्च 1948 को जयनारायण व्यास को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया!अत:इन सगंठनो के माध्यम से स्वतन्त्रता आन्दोलन मे तीव्रता आयी
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मारवाड़ राज्य लोक परिषद की स्थापना
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