राजस्थान के मुख्यमंत्री: महत्वपूर्ण तथ्य, कार्यकाल और राजनीतिक सफर | Complete Guide
राजस्थान के मुख्यमंत्री: महत्वपूर्ण तथ्य, कार्यकाल और राजनीतिक सफर | Complete Guide
राजस्थान मुख्यमंत्री से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
1-राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री कौन थे
उतर- हीरालाल शास्त्री
30 मार्च 1949 का दिन था. वृहद राजस्थान के उद्घाटन समारोह की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और कुछ ही देर में कांग्रेस के नेता हीरालाल शास्त्री यहां का पहला मुख्यमंत्री (इस पद को तब प्रधानमंत्री(24जनवरी1950तक) कहा जाता था) बनने के लिए शपथ लेने वाले थे. लेकिन लोकनायक कहे जाने वाले जयनारायण व्यास और माणिक्यलाल वर्मा जैसे दिग्गज नेता समारोह का बहिष्कार कर चले गए. उन्हें शिकायत थी कि समारोह में उनके बैठने के लिए सम्मानजनक व्यवस्था नहीं की गई थी
नोट- राजस्थान की पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल थे इन्हें राजस्थान में भूमि सुधारों का जनक भी कहा जाता है यह जयनारायण व्यास के समय उप मुख्यमंत्री भी रहे थे
2-पहले विधानसभा के चुनाव में राजस्थान की कितनी सीटों पर दो-दो प्रत्याशियों का चुनाव हुआ
उत्तर-राजस्थान की 20 सीटों पर व अजमेर मेरवाड़ा की 6सीटों पर।
नोट -पहले विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के प्रत्याशियों के प्रयाप्त स्थान के लिए राजस्थान में 140 सीटों पर 160 प्रत्याशियों का चुनाव हुआ यानी 20 सीटों पर दो-दो प्रत्याशियों का चुनाव हुआ तथा अजमेर मेरवाड़ा की 30 सीटों में से 6 सीटों पर दो-दो प्रत्याशियों का चुनाव हुआ!
वर्तमान राजस्थान की दृष्टि से उस समय राजस्थान में दो मुख्यमंत्री थे 1952 के चुनाव में अजमेर मेरवाड़ा से हरिभाऊ उपाध्याय मुख्यमंत्री बने और राजस्थान से टीकाराम पालीवाल मुख्यमंत्री बने
3-राजस्थान के कितने व्यक्ति मनोनीत मुख्यमंत्री रहे
उत्तर -तीन! हीरालाल शास्त्री,कदाम्बी शेषाटार वेंकटाचारी और जय नारायण व्यास
4-राजस्थान का वह व्यक्ति जो मनोनीत मुख्यमंत्री और निर्वाचित मुख्यमंत्री दोनों रहा
उत्तर -जय नारायण व्यास
1952 के आम चुनाव में जोधपुर में महाराजा हनुवंत सिंह ने 78.62 प्रतिशत वोट लेकर जय नारायण व्यास को हराया यहां जयनारायण व्यास को सिर्फ 21.38 फीसदी वोट पा सके वो भी तब जब उनकी पहचान पश्चिमी राजस्थान में सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानी की थी वहीं हनुवंत सिंह पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़े राजघराने से चुनाव लड़ रहे थे एक तरह से यह जयनारायण व्यास के स्वतंत्रता संघर्ष को ठुकराने के समान था
हनवंत सिंह कुशल पायलट थे लंबे चुनाव अभियान के बाद 26 जनवरी को महाराजा हनुवंत सिंह अपनी तीसरी पत्नी ज़ुबैदा के साथ अपने छह सीटर हवाई जहाज में सैर को निकले, कुछ देर बाद ही सुमेरपुर,पाली में विमान क्रैश हो गया और महाराजा और ज़ुबैदा दोनों की मौत हो गई चुनावों के नतीजे हनुवंत सिंह की मृत्यु के बाद आए और वे लोकसभा और विधानसभा दोनों में विजयी रहे हालांकि बाद में उनकी मौत के कारण दोनों सीटों के लिए उपचुनाव हुए
हनुवंत सिंह का जन्म 16 जून, 1923 को हुआ जबकि उनका देहांत 26 जनवरी, 1952 को हुआ यानी वे अपने जीवन के 29 साल भी पूरे नहीं कर सके हनुवंत सिंह का पहला विवाह 1943 में ध्रांगदा की राजकुमारी कृष्णा कुमारी से हुआ ...वे जून 1947 में जोधपुर के महाराजा बने... 1948 में उनकी मुलाकात 19 साल की स्कॉटिश नर्स सैंड्रा मकब्रिड से हुई...उनसे शादी की, तलाक हुआ... 1950 तीसरी शादी एक तलाकशुदा मुस्लिम अभिनेत्री ज़ुबैदा से की, जिनके पहले विवाह से एक पुत्र खालिद मोहम्मद था विवाह के बाद उनका नाम बदलकर विद्या रानी कर दिया गया इनसे हनवंत सिंह का एक पुत्र भी हुआ ....
....
5-पहले विधानसभा 1952 से 1957 तक राजस्थान में कितने मुख्यमंत्री रहे
उत्तर -तीन
राजस्थान में सर्वप्रथम टीकाराम पालीवाल को निर्वाचित मुख्यमंत्री बनाया गया उसके बाद जय नारायण व्यास किशनगढ़ से जीतकर आए तो जय नारायण व्यास को मुख्यमंत्री बनाया गया और टीकाराम पालीवाल को उपमुख्यमंत्री बनाया गया उसके बाद में जो जय नारायण व्यास अपनी पार्टी के विधायक के वोटिंग में बहुमत साबित नहीं करने कारण इस्तीफा देना पड़ा और 1954 में मोहनलाल सुखाड़िया को मुख्यमंत्री बनाया गया।
6-राजस्थान में पहले विधानसभा में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा गया?
उत्तर -160
7-राजस्थान में दूसरी विधानसभा में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा गया
उत्तर -176
8-राजस्थान में चौथी विधानसभा में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा गया
उत्तर -184 सीटों पर
चतुर्थ विधानसभा चुनाव में कुल सीटों की संख्या 184 हो गई थी
इन चुनाव में कांग्रेस को 89 सीटे प्राप्त हुई थी यानी बहुमत का आंकड़ा कांग्रेस नहीं जुटा पाई थी और इसी कारण 13 मार्च 1967 को सर्वप्रथम राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगा था
दूसरे बड़े दल के रूप में स्वतंत्र पार्टी का उभार हुआ जिसे 48 सीटें मिली थी
बात चतुर्थ विधानसभा की है जब 184 सीटों पर चुनाव हुआ था जिसमें कांग्रेस को 184 सीटों में से 89 सीट मिली वहीं जनता पार्टी, स्वतंत्र पार्टी और जनसंघ को 95 सीटें मिली...उस समय राज्यपाल संपूर्णानंद थे जिन्होंने सबसे बड़े दल के तौर पर कांग्रेस के मोहनलाल सुखाड़िया को सरकार बनाने का न्योता दे दिया जिसके विरोध में विपक्ष ने आंदोलन किया और जयपुर के जौहरी बाजार में हुईं गोलीबारी में नौ लोग मारे गये... इसके पश्चात 13 मार्च 1967 को राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया और कांग्रेस ने विधायकों का दल-बदल करवाकर सरकार बना ली और मोहनलाल सुखाड़िया ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली...
9-छठी विधानसभा से लेकर लगातार कितनी सीटों पर राजस्थान में चुनाव लड़ा जा रहा है
उत्तर -200 सीटों पर
10- राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री जो नियुक्त होते समय विधानसभा सदस्य नहीं थे
उतर- भैरों सिंह शेखावत, जगन्नाथ पहाड़िया
नोट- भैरों सिंह शेखावत राजस्थान के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे और बाद में उपराष्ट्रपति भी बने थे अशोक गहलोत के बाद सर्वाधिक कार्यकाल तथा तीन बार मुख्यमंत्री रहे
भैरोंसिंह शेखावत मध्य प्रदेश राज्यसभा के सदस्य थे 1977 उपचुनाव में वे छबड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा की सदस्य बने थे
11-राजस्थान में मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल
मोहनलाल सुखाड़िया -16 वर्ष 9 माह
अशोक गहलोत- 15 वर्ष
भैरोंसिंह शेखावत- 11 वर्ष 8 माह
वसुंधरा राजे- दस वर्ष
हरिदेव जोशी- आठ वर्ष
12. राजस्थान की एकमात्र दलित मुख्यमंत्री कौन से रहे हैं
उतर- जगन्नाथ पहाड़िया हाल ही में इनका देहांत हो गया है यह भी मुख्यमंत्री बनते समय विधानसभा के सदस्य नहीं थे
कवियत्री महादेवी वर्मा पर टिप्पणी के कारण इसे इस्तीफा देना पड़ा!
13. राजस्थान के वे मुख्यमंत्री जो मुख्यमंत्री घोषित होते समय आसाम के राज्यपाल थे
उतर- हरिदेव जोशी
नोट- यह एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो पहली से लेकर दसवीं विधानसभा तक निर्वाचित हुए थे इनका जन्म बांसवाड़ा कि खांदु गांव में हुआ था जहां माही नदी प्रवेश करती है
हरिदेव जोशी
राजस्थान का वह मुख्यमंत्री जिसका एक हाथ नहीं था, लेकिन उसकी सियासत पर पकड़ इतनी मजबूत थी कि उसने 10 बार चुनाव लड़ा और हर बार जीत हासिल की. राजस्थान का तीन बार मुख्यमंत्री बना, लेकिन दुर्भाग्य कहें या कुछ और वो कभी भी 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया
हरिदेव जोशी राजस्थान की एकमात्र से व्यक्ति थे जो असम के राज्यपाल बना दिए गए थे लेकिन बाद में इन्हें राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया हुआ यूं था कि शिवचरण माथुर से राजीव गांधी नाराज थे और आगामी चुनाव को देखते हुए इन्होंने दोबारा हरिदेव जोशी को मुख्यमंत्री बनना था
14. मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा संविधान के कौन से अनुच्छेद के तहत की जाती है
उतर-164
नोट- विधानसभा अध्यक्ष चयनित होता है ना कि नियुक्त
15. - राजस्थान की पहली विधानसभा के समय मुख्यमंत्री का दावेदार जय नारायण व्यास ने जालौर ए तथा जोधपुर बी दो जगह से चुनाव लड़ा लेकिन जोधपुर में यह किसके हाथों से पराजित हुए थे
उतर- मारवाड़ के अंतिम शासक हनुवंत सिंह
महाराजा हनुमत सिंह राम प्रजा परिषद पार्टी से चुनाव लड़े थे और पहले विधानसभा चुनाव में विपक्ष में सबसे ज्यादा सीटें राम प्रजा परिषद पार्टी(24सीट) को ही मिली थी
नोट- इसके बाद इनके लिए किशनगढ़ से चांदमल मेहता की सीट खाली करवाई गई और वहां से जीतकर मुख्यमंत्री बने, यह राजस्थान के निर्वाचित और मनोनीत मुख्यमंत्री बने हैं
16-. राजस्थान के कितने मुख्यमंत्री का जन्म राजस्थान से बाहर हुआ है
उतर- तीन
नोट- सी एस वैकंटाचारी का जन्म कर्नाटक में शिवचरण माथुर का जन्म मध्य प्रदेश तथा वसुंधरा राजे का जन्म मध्य प्रदेश
17-. आधुनिक राजस्थान के निर्माता किस मुख्यमंत्री को कहा जाता है
उतर- मोहनलाल सुखाड़िया
नोट- यह क्रिकेटर की पुत्र थे तथा चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी इनका कार्य का लगभग 17 साल रहा था और सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वाले भी यहीं थे इनका संबंध उदयपुर से है
जय नारायण व्यास को नवंबर, 1954 में बहुमत परीक्षण करवाना ही पड़ा. इसमें 110 विधायकों में से 51 ने व्यास का पक्ष लिया तो 59 के समर्थन से सुखाड़िया पांच साल में राजस्थान के पांचवें मुख्यमंत्री बनने में सफल हुए. इसके बाद सत्रह साल तक सुखाड़िया इस पद पर बने रहे
1969 के राष्ट्रपति चुनाव में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विधायकों से ‘अंतरात्मा की आवाज पर’ मत देने की अपील की थी, तब मोहनलाल सुखाड़िया ने इंदिरा गांधी की पसंद वीवी गिरि के बजाय नीलम संजीव रेड्डी पर गलत दांव खेला और इसका खामियाजा उठाया.
18-राजस्थान में टीकाराम पालीवाल, जय नारायण व्यास, जगन्नाथ पहाड़िया तथा भैरो सिंह शेखावत राज्यसभा के सदस्य रहे थे
टीकाराम पालीवाल तथा जगन्नाथ पहाड़िया राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा के सदस्य भी रहे थे
19. राजस्थान में अब तक कितने उप मुख्यमंत्री रहे हैं
उतर-7
राजस्थान के पहले उप मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल, दूसरे हरिशंकर भाभडा़, तीसरे कमला बेनीवाल चौथे बनवारी लाल बेरवा , पांचवे सचिन पायलट और वर्तमान में प्रेमचंद बेरवा तथा दिया कुमारी उपमुख्यमंत्री है
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री
✅ राजस्थान की पहली महिला उपमुख्यमंत्री - कमला बेनीवाल
✅ राजस्थान की दूसरी महिला उपमुख्यमंत्री - दीया कुमारी
✅ वे उपमुख्यमंत्री जो विधान सभा के अध्यक्ष रहे - हरिशंकर भाभड़ा
✅ सर्वाधिक लंबी अवधि तक उपमुख्यमंत्री - हरिशंकर भाभड़ा
✅ सबसे कम कार्यकाल वाले उपमुख्यमंत्री - कमला
बेनिवाल
✅ राजस्थान के प्रथम उपमुख्यमंत्री - टीकाराम पालीवाल
✅ प्रथम गैर-कांग्रेसी उपमुख्यमंत्री - हरिशंकर भाभड़ा
20.- राजा मानसिंह हत्याकांड (डीग हत्याकांड) के कारण कौन से मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा
उत्तर- शिवचरण माथुर
21-कौन से मुख्यमंत्री को पार्टी के विधायकों की वोटिंग में बहुमत नहीं पाने के कारण इस्तीफा देना पड़ा?
उत्तर -जय नारायण व्यास
22-राजस्थान का एकमात्र अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री कौन था
उत्तर -बरकतुल्लाह खान
कैसी चल रही है शादीशुदा जिंदगी बरकत ने जवाब दिया- शादी तो तुमसे करनी थी तुम थीं नहीं तो शादीशुदा कैसे होता बाकी जिंदगी है, जो चलती ही है, सो चल रही है
(ये कथन बरकतुल्लाह खान ने उषा मेहता को उस समय कहा था जब वे 3 साल पश्चात मिले थे )
यह संवाद उषा मेहता और राजस्थान के एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री रहे बरकतुल्लाह खान के बीच थे बरकतुल्लाह खान को प्यारे मियां के नाम से जाना जाता था जब यह ने मुख्यमंत्री बनाया जा रहा था उस समय वह लंदन थे मोहनलाल सुखाड़िया की अस्थिर सरकार तथा विधायकों के विरोध के कारण 1971 में इन्हें मोहनलाल सुखाड़िया के त्यागपत्र के पश्चात मुख्यमंत्री बनाया गया था बरकतुल्लाह खान का सबसे महत्वपूर्ण कार्य जिन क्षेत्रों में शराब बंद थी तथा वहां पर अवैध तस्करी बढ़ रही थी वहां पर लीगल तरीके से शराब चालू करना था जिससे सरकार का राजस्व 33% बढ़ गया और तस्करी खत्म हुई ...
नोट -राष्ट्रपति के चुनाव में राजस्थान के विधायक और मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने कांग्रेस समर्थित राष्ट्रपति उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी को वोट दिया और इंदिरा गांधी समर्थित वी वी गिरी को वोट नहीं दिया चुनाव में वी वी गिरी के जीत होने के बाद में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मोहनलाल सुखाड़िया से इस्तीफा लेकर बरकतुल्लाह खान को मुख्यमंत्री बनाया।राजस्थान को 1971 में पहला पैराशूट और अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री यानी बरकतुल्लाह ख़ान का नेतृत्व मिला. 1973 में ख़ान के असामयिक निधन के बाद पार्टी के अनुशासित सिपाही हरिदेव जोशी ने यह बागडोर संभाली. इस बात पर आज भी सवाल खड़े किए जाते हैं पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के नाम पर कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई थी कि तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रामनिवास मिर्धा को परास्त कर जोशी राजस्थान के मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए?
23-राजस्थान में सबसे कम कार्यकाल का मुख्यमंत्री कौन था?
उत्तर -हीरालाल देवपुरा
हीरालाल देवपुरा मुख्यमंत्री बनने के बाद राजस्थान विधानसभा का अध्यक्ष रहा।
सातवीं विधानसभा (1980-1985) में एक बार फिर कांग्रेस सत्ता में रही लेकिन इस दौरान भी पार्टी ने तीन मुख्यमंत्री बदले. 1980 में संजय गांधी के करीबी जगन्नाथ पहाड़िया को मुख्यमंत्री चुना गया.राजनीतिक जानकारों के अनुसारकवियत्री महादेवी वर्मा पर टिप्पणी के कारण इसे इस्तीफा देना पड़ा!हुआ यूं की जयपुर के कवि सम्मेलन में जगन्नाथ पहाड़िया ने महादेवी वर्मा पर टिप्पणी कर दी कि ये पता नहीं क्या लिखतीं है समझ में नहीं आता ।इससे पुरे देश में पहाड़िया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया लेकिन तमाम कारणों के चलते राज्य की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और संगठन के प्रमुख नेता शिवचरण माथुर ने अपने समर्थकों के साथ जाकर इंदिरा गांधी से इस बात की शिकायत की. नतीजतन पहाड़िया से इस्तीफा लेकर जुलाई, 1981 में शिवचरण माथुर को सूबे का मुख्यमंत्री चुना गया. लेकिन 1985 में डीग-कुम्हेर (भरतपुर) के निर्दलीय प्रत्याशी और पूर्व जाट राजघराने से ताल्लुक रखने वाले मानसिंह की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई. मानसिंह पर शिवचरण माथुर की अनुपस्थिति में उनका हेलीकॉप्टर और उनकी सभा का मंच तोड़ देने का आरोप था. मामले की गंभीरता को देखते हुए माथुर से आधी रात को ही इस्तीफा ले लिया गया और हीरालाल देवपुरा को मुख्यमंत्री बनाया गया.
1985 के विधानसभा चुनाव के बाद हीरालाल देवपुरा के ही मुख्यमंत्री बने रहने की पूरी संभावना थी. लेकिन हरिदेव जोशी पार्टी आलाकमान को लुभाने में सफल रहे और बाजी मार ले गए. लेकिन सितंबर, 1987 को सीकर के दिवराला सती कांड को लेकर मंत्री नरेंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में अपनी ही सरकार की जमकर आलोचना की. बताया जाता है कि भाटी ने इस घटना को रोक पाने में असफल रहे जोशी के विरुद्ध तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कान भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी. 1986 में जब राजीव गांधी रणथंभौर अभ्यारण्य में भ्रमण के लिए आए तो भाटी की सलाह पर जोशी ने सादगी से उनका स्वागत किया, जो गांधी को अखर गया. हालांकि इस मामले मे जोशी अपना पक्ष मजबूती से रख पाए और भाटी को शक्ति केंद्र बनने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
लेकिन अगले ही साल जब राजीव गांधी सरिस्का अभ्यारण्य गए तो जोशी के हिस्से में एक बार फिर नाराज़गी ही आई. दरअसल, इस बार राजीव ने बेहद साधारण तरीके से स्वागत करने के निर्देश दिए थे. लेकिन जोशी को पिछला सबक याद था. उन्होंने नेताओं के साथ तमाम तामझाम इकठ्ठा तो कर लिया था, किंतु उचित मौका मिलने तक उन्हें अभ्यारण्य से दूर रखा था. प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि जोशी विरोधियों ने सड़क पर लगे दिशानिर्देशों को उस तरफ मोड़ दिया जहां सैंकड़ो गाड़ियां खड़ी थीं. अपनी कार खुद चला रहे राजीव निर्देशों के सहारे वहां पहुंच गए और उस लवाजमे को देखकर भौचक्के रह गए. इसके बाद उन्होंने जोशी को जमकर लताड़ लगाई. वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता से ऐसा व्यवहार करने पर राष्ट्रीय मीडिया ने राजीव गांधी को जमकर आड़े हाथों लिया और आखिर में उनकी खीज उतरी जोशी पर. 1988 में जोशी से उनका पद छीन लिया गया और शिवचरण माथुर को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया.
1989 के लोकसभा चुनावों में बोफोर्स कांड के काले साये में घिरी कांग्रेस के हाथों से राजस्थान की सभी पच्चीस सीटें फिसल गईं जो उसे 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद मिली थीं. केंद्र में राजीव कमजोर हो चुके थे. मौका भांपकर राजस्थान में माथुर के विरोधियों ने उन्हें पद से हटाने में देर नहीं लगाई और असम के राज्यपाल बना दिए गए हरिदेव जोशी एक बार फिर मुख्यमंत्री बनकर राजस्थान आए. हालांकि अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी.
24-राजस्थान की कौन सी विधानसभा में उपाध्यक्ष नहीं बनाया गया
उत्तर -15वीं विधानसभा
25.-15वीं विधानसभा में कितने दिन सदन चला
उत्तर -8सत्र हुए जिसमें 147 दिन से दिन सदन चला।
26.-15वीं विधानसभा की आखिरी बैठक कब हुई
उत्तर -2 अगस्त 2023
27-ऐसे मुख्यमंत्री जिसके शासनकाल में दो बार राष्ट्रपति शासन लगा
उत्तर -भैरों सिंह शेखावत
राजस्थान में राष्ट्रपति शासन:-
● 13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल, 1967 (44 दिन तक)
● 30 अप्रैल, 1977 से 21 जून, 1977 (53 दिन तक)
● 17 फरवरी, 1980 से 5 जून 1980 (110 दिन तक)
● 15 दिसंबर, 1992 से 3 दिसंबर, 1993 (354 दिन)
28- वर्तमान समय में राजस्थान की मुख्यमंत्री कौन है
उतर- भजनलाल शर्मा
राजस्थान के नए मुख्यमंत्री भजनलाल जी शर्मा शपथ ग्रहण समारोह
भजनलाल शर्मा व्यक्तिगत रूप से 14 मुख्यमंत्री व पद के रूप में 26 में मुख्यमंत्री हैं!
मुख्यमंत्री को अनुच्छेद 164(3) के तहत शपथ राज्यपाल के द्वारा दिलवाए जाने का प्रावधान है
अपने जन्मदिन पर शपथ ग्रहण करने वाले यह राजस्थान के पहली मुख्यमंत्री बने हैं।
(29)16वीं विधानसभा से सबसे ज्यादा वोटो से जीतने वाला विधायक कौन है
उत्तर -दीया कुमारी
(30.-)16 वीं विधानसभा में सबसे कम वोटो से जीतने वाला विधायक कौन है
उत्तर -हंसराज पटेल
(31)16वीं राजस्थान विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर कौन थे
उत्तर -कालीचरण सर्राफ
(32)16 वीं राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष कौन है
उत्तर -वासुदेव देवनानी
(33)वासुदेव देवनानी राजस्थान विधानसभा के कौन से अध्यक्ष बने?
उत्तर -17 वें
(34)-16वीं राजस्थान विधानसभा में कितनी महिलाएं चुनकर आई
उत्तर -20 महिलाएं
(35)-16वीं विधानसभा में सबसे कम उम्र का विधायक कौन है
उत्तर -रविंद्र सिंह भाटी ( शिव) 25 वर्ष
36-)16वीं विधानसभा में सबसे अधिक उम्र का विधायक कौन है
उत्तर -दीपचंद खैरिया व हरि मोहन शर्मा (83 वर्ष)
अनुच्छेद 164(1) - मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा
अनुच्छेद 164(2) मंत्रिपरिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदाई
अनुच्छेद 164(3) मंत्रिपरिषद के शपथ का प्रावधान
164(4) किसी मंत्री के लिए 6 माह में राज्य विधानमंडल का सदस्य होना अनिवार्य ।इसी अनुच्छेद के तहत राजस्थान में 16 वीं विधानसभा में सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी को मन्त्री बनाया गया।
164(5) मंत्रियों के वेतन भत्ते राज्य संचित निधि से
▪️राजस्थान 16वीं विधानसभा चुनाव 2023 परिणाम:
(200 सीट)
✔️राजस्थान के करणपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार रुपिंदर सिंह कुन्नर ने बीजेपी प्रत्याशी और राज्य सरकार में मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी को 11,283 वोटों से हरा दिया है,
👁🗨 अब राजस्थान विधानसभा के 200 सीटों पर दलीय स्थिति:
👉 भाजपा(BJP) -115
👉 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(INC) - 70
👉 भारत आदिवासी पार्टी(BAP) - 3
👉 बहुजन समाज पार्टी(BSP) - 2
👉 राष्ट्रीय लोक दल (RLD) - 1
👉 राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ( RLP ) - 1
(हनुमान बेनीवाल)
👉 निर्दलीय( 8 )
1.बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट से रविंद्र सिंह भाटी।
2.डीडवाना विधानसभा सीट से यूनुस खान।
3.चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट से चंद्रभान आक्या।
4.बयाना विधानसभा सीट से डॉ. ऋतु बनावत।
5.बाड़मेर विधानसभा सीट से डॉ. प्रियंका चौधरी।
6.हनुमानगढ़ विधानसभा से गणेशराज बंसल।
7.सांचोर विधानसभा से जीवाराम चौधरी।
8.भीलवाड़ा विधानसभा से अशोक कुमार कोठारी।
*राजस्थान का मंत्रिमंडल 16 वीं विधानसभा
*केबिनेट मंत्री*
*1- किरोड़ीलाल मीना*
*2- गजेंद्र सिंह खींवसर*
*3- राज्यवर्धन सिंह राठौड़*
*4-बाबू लाल खराड़ी*
*5-मदन दिलावर*
*6-जोगा राम पटेल*
*7-सुरेश सिंह रावत*
*8- अविनाश गहलोत*
*9- जोड़ा राम कुमावत*
*10-हेमंत मीना*
*11-कन्हैया लाल चौधरी*
*12- सुमित गोदारा*
*राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार*
*13- संजय शर्मा*
*14- गौतम कुमार*
*15-झांवर सिंह खर्रा*
*16-सुरेंद्र पाल सिंह टीटी*(चुनाव हारने के बाद इस्तिफा)
*17-हीरा लाल नागर*
*राज्य मंत्री*
*18-ओटा राम देवासी*
*19- मंजू बाघमार*
*20-विजय सिंह चौधरी*
*21-कृष्ण कुमार बिश्नोई*
*22-जवाहर सिंह बेढम*
*कुल 22 मंत्रियों ने ली शपथ*
जालोर विधानसभा क्षेत्र विधायक श्री जोगेश्वर गर्ग जी मुख्य सचेतक राजस्थान विधानसभा नियुक्त ।
हाल में हुए 5 राज्यो के चुनाव में नियुक्त मुख्यमंत्री
1.मिजोरम के मुख्यमंत्री : श्री लालदुहोमा
2. राजस्थान के नए मुख्यमंत्री : श्री भजन लाल शर्मा
3.मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री : श्री मोहन यादव
4. तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री : श्री रेवंत रेड्डी
5 छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री: श्री विष्णु देव साय
#RajasthanCM #BhajanLalSharma #RajasthanPolitics #RajasthanGK #CurrentAffairs #IndianPolity #CMRajasthan #CompetitiveExams #GKIndia #PolityWorld360
Rajasthan Chief Minister
Bhajan Lal Sharma Biography
Rajasthan CM 2024
Rajasthan Politics
Rajasthan Government
Chief Minister of Rajasthan facts
Rajasthan GK
Rajasthan current affairs
Rajasthan polity
Rajasthan leadership


Sir aapka teligarm चेनल नहीं है क्या
जवाब देंहटाएं