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राजस्थान परीक्षा अधिनियम, 2022 RAS

 राजस्थान परीक्षा अधिनियम, 2022 (आधिकारिक नाम: Rajasthan Public Examination (Measures for Prevention of Unfair Means in Recruitment) Act, 2022 / राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2022) का विस्तृत परिचय, उद्देश्य, मुख्य प्रावधान, दंड और अन्य महत्वपूर्ण बातें सरल भाषा में समझाई गई हैं:

🧾 1. अधिनियम का परिचय और उद्देश्य

राजस्थान परीक्षा अधिनियम 2022 का लक्ष्य राज्य में आयोजित सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। यह अधिनियम अनुचित साधन (Unfair Means) और प्रश्नपत्र लीक सहित अन्य धोखाधड़ी को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। 

📌 इसे 5 अप्रैल 2022 को राज्य में लागू किया गया था और यह राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आता है। 


📌 2. मुख्य उद्देश्य

यह अधिनियम विशेष रूप से यह सुनिश्चित करता है कि:

भर्ती परीक्षाएँ निष्पक्ष रूप से संपन्न हों।

किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों, कागज़ लीक, नकल-चोरी आदि के मामलों में सख्त कार्रवाई हो।

परीक्षार्थी और परीक्षाओं से जुड़े अन्य व्यक्तियों द्वारा परीक्षा प्रक्रिया को धोखे से प्रभावित न किया जा सके। �


⚖️ 3. “अनुचित साधन” (Unfair Means) की परिभाषा

इस अधिनियम के तहत “अनुचित साधन” में शामिल हैं:

किसी अन्य व्यक्ति, समूह या बाहरी स्रोत से अनधिकृत सहायता लेना।

प्रतिरूपण (Impersonation) या किसी इलेक्ट्रॉनिक/मुद्रित सामग्री का गलत उपयोग।

प्रश्नपत्र लीक करना या लीक का प्रयास करना। �


📜 4. मुख्य प्रावधान और धाराएँ

🟥 (i) अनुचित साधन के लिए दंड

परीक्षार्थी यदि अनुचित साधन का उपयोग करते हैं तो उन्हें अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम ₹1,00,000 का जुर्माना दिया जा सकता है।

जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त 9 महीने की जेल हो सकती है।

दोषी पाए जाने पर वह व्यक्ति दो साल तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा में नहीं बैठ सकता। 

 (ii) प्रश्नपत्र लीक, छेड़छाड़ या साजिश के लिए दंड

सवालपत्र लीक करने, उसे अनधिकृत रूप से हासिल करने/प्रकाशित करने पर 5 से 10 वर्ष तक की सजा और ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

ऐसे अपराध भी संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य माने जाते हैं। 


 (iii) अपराधों की श्रेणियाँ

सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) हैं — पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।

नॉन-बैलबेल (Non-Bailable) — जमानत की गारंटी नहीं।

नॉन-समझौता योग्य (Non-Compoundable) — मामले में पक्षकार आपसी समझौता नहीं कर सकते। �

 (iv) जाँच और जांच अधिकारी

इस अधिनियम के तहत जाँच केवल वरिष्ठ अधिकारी (Additional SP स्तर या उससे ऊपर) कर सकते हैं, ताकि जांच गंभीर और निष्पक्ष रहे। �


 (v) न्यायालय और सुनवाई

अपराधों की सुनवाई विशेष रूप से नामित न्यायालयों (Designated Courts) में होगी, जिन्हें राजस्थान उच्च न्यायालय से परामर्शकर नियुक्त किया जाता है।

इन न्यायालयों में केस तेजी से और विशेषज्ञता के साथ निपटाया जाता है। �


 (vi) कुर्की और जब्ती (Attachment & Confiscation)

जो व्यक्ति इन अपराधों से अर्जित संपत्ति का लाभ उठाता है, वह अवैध होगा।

ऐसी संपत्ति (नकद या अचल) को सरकार द्वारा जब्त किया जा सकता है। �


🔎 5. अधिनियम के प्रभाव

➡️ इस कानून के लागू होने के बाद राजस्थान में:

परीक्षाओं में धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी रोक लगी है।

परीक्षा पेपर लीक और नकल के मामलों पर कानूनी कार्रवाई तेज़ हुई है।

दोषी पाए जाने पर भारी सज़ा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है, जिससे भविष्‍य में अनुचित तरीकों को रोकने में मदद मिलती है। �


🧑‍⚖️ 6. व्यवहार में भी प्रभाव

इस अधिनियम के तहत राजस्थान में परीक्षा धोखाधड़ी और अप्राकृतिक गतिविधियों के कई मामले सामने आए, जिनमें इस कानून के प्रावधानों के तहत आरोपी पर कार्रवाई हुई। उदाहरण के लिए, 2022 परीक्षा जाल के संदर्भ में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जिसमें इस अधिनियम का भी उल्लंघन शामिल रहा। 


 संक्षेप में — मुख्य बिंदु

विषय

मुख्य बातें

उद्देश्य

भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना

दंड

3-10 वर्ष तक जेल + भारी जुर्माना

अनुचित साधन

नकल, सहायता, ई-डिवाइसेस, प्रश्नपत्र लीक आदि

गुना प्रकार

संज्ञेय, गैर-जमानती, गैर-समझौता योग्य

जाँच अधिकारी

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी

संपत्ति जब्ती

अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त




राजस्थान परीक्षा अधिनियम, 2022

(Section-wise Explanation)

🔹 धारा 1 : संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ

इस अधिनियम का नाम राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 है।

इसका विस्तार सम्पूर्ण राजस्थान राज्य तक है।

राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने की तिथि से यह लागू हुआ।

🔹 धारा 2 : परिभाषाएँ (Definitions)

इस धारा में अधिनियम में प्रयुक्त महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषा दी गई है, जैसे—

सार्वजनिक परीक्षा – राज्य सरकार/उसके अधीन संस्थाओं द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाएँ।

परीक्षार्थी – जो व्यक्ति परीक्षा में सम्मिलित हो।

अनुचित साधन (Unfair Means) – नकल, प्रश्नपत्र लीक, प्रतिरूपण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का दुरुपयोग आदि।

प्राधिकृत व्यक्ति – परीक्षा संचालन से संबंधित अधिकारी/कर्मचारी।

👉 यह धारा अधिनियम की व्याख्या का आधार है।

🔹 धारा 3 : अनुचित साधनों का निषेध

कोई भी व्यक्ति परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग नहीं करेगा।

नकल करना, करवाना या सहायता लेना इस धारा के अंतर्गत अपराध है।

🔹 धारा 4 : प्रश्नपत्र से संबंधित अपराध

इस धारा के अंतर्गत निम्न कृत्य अपराध माने गए हैं—

प्रश्नपत्र लीक करना या करवाना

प्रश्नपत्र को अनधिकृत रूप से प्राप्त करना

परीक्षा से पूर्व प्रश्नों का प्रचार-प्रसार करना

🔹 धारा 5 : साजिश और संगठित अपराध

यदि कोई व्यक्ति अकेले या समूह में परीक्षा से संबंधित अपराध की साजिश करता है,

या किसी गिरोह के माध्यम से ऐसा करता है, तो वह इस अधिनियम के अंतर्गत दोषी होगा।

🔹 धारा 6 : प्रतिरूपण (Impersonation)

किसी अन्य के स्थान पर परीक्षा देना

किसी को अपने स्थान पर परीक्षा दिलवाना

➡️ दोनों ही स्थितियाँ अपराध हैं।

🔹 धारा 7 : परीक्षा प्रक्रिया में बाधा

परीक्षा कार्य में बाधा डालना

परीक्षा केंद्र पर अव्यवस्था फैलाना

अधिकारियों को कार्य करने से रोकना

➡️ यह भी दंडनीय अपराध है।

🔹 धारा 8 : परीक्षार्थी के लिए दंड

यदि परीक्षार्थी दोषी पाया जाता है तो—

3 वर्ष तक का कारावास

न्यूनतम ₹1 लाख जुर्माना

2 वर्ष तक किसी भी सरकारी परीक्षा से वंचित

🔹 धारा 9 : अन्य व्यक्तियों के लिए दंड

(कोचिंग संचालक, दलाल, कर्मचारी आदि)

5 से 10 वर्ष तक का कारावास

₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक जुर्माना

🔹 धारा 10 : अपराध की प्रकृति

इस अधिनियम के सभी अपराध—

संज्ञेय (Cognizable)

गैर-जमानती (Non-Bailable)

गैर-समझौता योग्य (Non-Compoundable) हैं।

🔹 धारा 11 : जाँच अधिकारी

इस अधिनियम के अंतर्गत जाँच केवल अपर पुलिस अधीक्षक (Additional SP) या उससे उच्च अधिकारी करेगा।

🔹 धारा 12 : विशेष न्यायालय

राज्य सरकार द्वारा विशेष न्यायालय गठित किए जाएंगे।

इन मामलों की सुनवाई केवल इन्हीं न्यायालयों में होगी।

🔹 धारा 13 : संपत्ति की कुर्की

अपराध से अर्जित धन या संपत्ति राज्य सरकार द्वारा कुर्क की जा सकती है।

🔹 धारा 14 : अपराध में सहायता

अपराध में सहायता करने वाला व्यक्ति भी मुख्य अपराधी के समान दंड का भागी होगा।

🔹 धारा 15 : कंपनियों द्वारा अपराध

यदि कोई कंपनी/संस्था अपराध में लिप्त पाई जाती है तो—

कंपनी

उसके निदेशक

प्रबंधक

सभी उत्तरदायी माने जाएंगे।

🔹 धारा 16 : नियम बनाने की शक्ति

राज्य सरकार को इस अधिनियम को लागू करने हेतु नियम बनाने की शक्ति दी गई है।

🔹 धारा 17 : कठिनाइयों का निवारण

अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों को राज्य सरकार आदेश द्वारा दूर कर सकती है।

 परीक्षा-उपयोगी निष्कर्ष

यह अधिनियम पेपर लीक और नकल रोकने हेतु कठोर कानून है।

इसमें कड़ी सजा, भारी जुर्माना और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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